नारी सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं सरिता

अपने जीवन को संघर्ष के शिखर पर चढ़ाने से कभी नहीं हिचकी सरिता

 हाजीपुर:- दृढ़ इच्छाशक्ति और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो लक्ष्य तक पहुचने की राह आसान बन जाती हैं और आगे बढ़ने का रास्ता आसान हो जाता हैं। इस भागमभाग दौर में भी कुछ ऐसे भी लोग हैं जिन्हें अपने साथ-साथ समाज व देश की चिंता है। नारी कमजोर नहीं होती वह अगर ठान ले तो हर मुकाम को हासिल कर सकती हैं। ऐसा ही नाम है बिहार की बेटी सरिता राय की जो आज नारी सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। सरिता राय की हौसले ने उड़ान भरी और सफलता ने उनकी कदम छुई और आज उनकी कृति क्षितिज पर चमक रही है। सरिता राय अपने जीवन को संघर्ष के शिखर पर चढ़ाने से कभी नहीं हिचकी। गरीबों, वंचितों के बीच जातपात व धर्म समाज से ऊपर उठकर अपने दम पर आज वह नारी सशक्तिकरण के लिए कटिबद्ध है। प्रारंभिक दौर से विलक्षण प्रतिभा की धनी रही सरिता राय का लगाव शिक्षा से रहा है।
बालिकाओं, महिलाओं के उत्थान के प्रति इनका रुझान रहा है। दलित, महादलित, बालिकाओं, महिलाओं को जागरूक कर समाज के मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रयासरत है। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को जो कूड़ा कचरा चुनने, मैले कुचले व निरक्षरता के बीच बाल मजदूरी करने को मजबूर अपनी जिंदगी बसर कर रहे उन गरीब और छोटे बच्चों, महिलाओं के बीच शिक्षा का अलख जगाकर उनके भविष्य को संवारने का कार्य कर रही हैं। सरिता के अपने आर्थिक कमाई से इनके द्वारा चलाये जा रहे टॉपर स्टडी पॉइंट उड़ान क्लास जहाँ आज पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 200 के पार हो चुकी हैं। शिक्षा का अलख जगाने वाली सरिता राय से इनके ये नोनिहाल छात्र मानो यही कह रहे हैं तुम बाल दिवस का जश्न मनाने हो हमे तो पता भी नहीं हमारा भी कोई दिन होता हैं। वर्ष 2009 से ही सरिता राय कर रही है समाजसेवा:- बचपन से ही समाजसेवा का जज्बा दिल में रखने वाली सरिता राय को हाथ पर हाथ रखकर बैठना गंवारा नहीं था। बचपन से ही सरिता का रुझान समाजसेवा की तरफ था। पढ़ाई पूरी होने के बाद बच्चों को पढ़ाने का कार्य शुरू की। ऐसे में उन्होंने मातृभूमि की सेवा करने के लिए समाजसेवा का संकल्प लिया। पहले गरीब और जरूरतमंद लोगों के घर जाकर तो अब सोशल मीडिया के माध्यम से बच्चों को संस्था के बैनर तले शिक्षा देकर उन्हें शिक्षा की ओर जागृत कर रही हैं। जीवन में ऊंचा और सकारात्मक सोच रखने वाली सरिता राय का मानना है कि अगर देश का प्रत्येक बच्चा शिक्षित हो जाये तो हमारा देश खुद ब खुद विकसित बन जाएगा। कुछ इस तरह हुई मुहिम की शुरुआत:- समाज में गरीब बच्चों की स्थिति को देखकर सरिता राय ने 2009 में एक संस्था टॉपर स्टडी पॉइंट उड़ान शुरू करने की सोची जिसमें वैसे बच्चे जो किसी कारणवश अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं, वैसे बच्चे जो कपड़ा बीनते है, होटलों में काम करते हैं या फिर किसी के घर पर काम करते हैं उस तरह के बच्चे को इकट्ठा करना शुरू कर दिया इस तरह से सरिता राय ने 100 बच्चों को इकट्ठा किया। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों के माता-पिता को समझाने में आई क्योंकि उन्हें लगता था कि अगर बच्चे पढ़ाई करने लगेंगे तो बच्चे जो कही काम करके पैसा कमाते है वो भी रुक जाएगा और जब बच्चे पैसा कमा ही लेते हैं तो उन्हें पढ़ने की क्या जरूरत है। धीरे-धीरे से सरिता राय बच्चों के माता-पिता को समझाने में कामयाब रही और हर दिन एक दो नए बच्चे उनके पास पढ़ने आ जाते हैं। टॉपर स्टडी पॉइंट उड़ान का मुख्य उद्देश्य:- सरिता राय शिक्षा के लिए जीवन को एक उपहार समझती है। गरीब एवं असहाय परिवारों में जाकर छोटे बच्चे को इकट्ठा करना और उनको नामांकित करने के बाद हर रविवार को उनको पढ़ाना ताकि जो उनका शिक्षा का अधिकार है वो उनको मिल सके और किसी अच्छे स्कूल में उनका नामांकन हो सके वैसे बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना ही टॉपर स्टडी पॉइंट उड़ान का मुख्य उद्देश्य है। आपको बता दें कि सरिता राय बचपन से एक शिक्षित परिवार में रही हैं। इसका उनपर काफी प्रभाव पड़ा है। इन्हें बचपन से ही पढ़ाई के महत्व का पता चल गया था। उनके पिता फारेस्ट ऑफिसर होने के कारण उनके घर पर अक्सर गुणवान और ज्ञानी लोग घर पर आते थे। सरिता राय ने कहा कि हमारी संस्था की पूरी कोशिश है कि इन बच्चों को यह एहसास हो कि बाल दिवस उन्हीं के लिए है ताकि बाल मजदूरी से ये बाहर निकले और ‘पढ़ोगे तो आगे बढ़ोगे’ का सपना साकार हो सकेगा इसके लिए मेरी संस्था पूरी कोशिश कर रही हैं। संस्था के माध्यम से बचपन को बचाने, सवारने और सजाने के लिए कार्य किया जा रहा है। बच्चे देश के भविष्य है और उनके भविष्य को बचाने के लिए हमलोगों को एकजुट होने की जरूरत है। सरिता शिक्षा के माध्यम से समाज के अंदर एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रही है।

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