अतिक्रमण की चपेट में है नहर, कैसे होगी सिंचाई

सहरसा:- जिले की अधिकांश नहरों के ध्वस्त रहने और अतिक्रमित रहने से किसान खेतों की सिचाई नहीं कर पा रहे हैं। नहरों पर जहां-तहां दुकान खोल लिया गया तो कई जगहों पर लोगों ने भूमि का अतिक्रमण कर अब वहां पर घर बना लिया है जिसके कारण नहरों में पानी आना भी बंद हो गया है। शहरी क्षेत्र से गुजरने वाली नहरों का समाप्त हो रहा है अस्तित्व:-सहरसा जिले में सहरसा उपशाखा के अधीन 90 किलोमीटर और सुपौल उपशाखा के अधीन 32 किलोमीटर नहर है। इन नहरों की स्थिति ठीक नहीं है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण जगह-जगह इसका अतिक्रमण कर लिया गया है। शहरी क्षेत्र में जमीन की कीमत बढ़ जाने के कारण नगर से गुजरनेवाली नहर को अगल-बगल के लोग अस्तित्व ही समाप्त करने पर आमदा है, जबकि कुसहा त्रासदी के समय इन नहरों के जीर्णोद्धार के नाम पर करोड़ों की राशि खर्च की गई है। शहरी क्षेत्र के समीप रूपनगरा माईनर और कहरा माईनर पर सबसे अधिक अतिक्रमण कारियों की नजर लग गई है। जिस ओर से नहर गुजरी है, वहां की जमीन की कीमत करीब 30-35 लाख रुपये कट्ठा हो गई है। ऐसे में लालचवश लोग नहर के आसपास की जमीन पर कब्जा कर रहे हैं। प्रभावित हो रही खेती:- नहर के माध्यम से राज्य सरकार ने खरीफ की सिचाई के लिए 88 रुपये प्रति एकड़ और रबी के लिए सौ रुपये सिचाई शुल्क निर्धारित किया है जो किसानों के लिए काफी सुविधाजनक हो गई थी, परंतु अब अतिक्रमण और नहरों के ध्वस्त होने से किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार ने हर खेत को पानी पहुंचाने की जो योजना बनाई है, उसमें नहर के इर्द- गिर्द के खेतों को सर्वे में छोड़ दिया गया है। ऐसे में इन किसानों को आनेवाले दिनों में भी नहर के समीप वाले खेतों तक पानी पहुंचना कठिन होगा। अधीक्षण अभियंता श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि इस संबंध में शीघ्र ही विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराई जाएगी।

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