एआईएसएफ का 32 वा राज्य सम्मेलन सम्पन्न, शिक्षा के निजीकरण पर किया चिंता व्यक्त

सरकार को शिक्षा के निजीकरण के प्रति किया सचेत

सिवान:-एआईएसएफ के 32 वा राज्य सम्मेलन के अंतिम दिन बिहार राज्य एआईएसएफ के अध्यक्ष रणजीत पंडित ने राजनीतिक प्रतिवेदन एवं संगठन का सांगठनिक एवं कार्य प्रतिवेदन एआईएसएफ के  राज्य सचिव सुशील कुमार ने सम्मेलन में बहस के लिए प्रस्तुत किया। सम्मेलन ने महसूस किया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से घटनाक्रम बदल रहे हैं पूरे दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ रहा है पड़ोसी मुल्कों में जनतंत्र को कुचलने की साजिश हो रही है। सम्मेलन में भारत में शिक्षा के निजीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए वर्तमान सरकार को शिक्षा के निजीकरण एवं भगवाकरण करने के प्रति सचेत किया। सम्मेलन में किसानों के चल रहे आंदोलन पर चिंता जाहिर की और अविलंब उनके मांगों को पूरा कर आंदोलन को समाप्त करवाने की दिशा में पहल की मांग की। पूरे देश एवं राज्य में बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त करते हुए रोजगार की दिशा में आवश्यक पहल करने की मांग की गई। बिहार सरकार के द्वारा अनुसूचित जाति एवं छात्राओं के निःशुल्क शिक्षा के  फैसले को सरजमीन पर उतारने की मांग करते हुए सम्मेलन ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अविलंब छात्र और युवाओं की मांगों को सरकार पूरा करें अन्यथा संगठन राज्य सम्मेलन में निर्णय लेकर आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेगी। सम्मेलन में यह भी निर्णय लिया गया कि सामाजिक स्तर पर व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ जन जागरण अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने का काम करेगी। सम्मेलन में बैजनाथपुर पेपर मिल चालू कराने, काम के अधिकार को मौलिक अधिकार में शामिल करने, बेरोजगारों को रोजगार देने, विश्वविद्यालय में एकेडमिक कैलेंडर लागू कर नियमित पढ़ाई एवं परीक्षा की व्यवस्था करने, भगत सिंह रोजगार गारंटी एक्ट लागू करने सहित अन्य प्रस्ताव पास किए गए। सम्मेलन को संबोधित करते हुए एआईएसएफ के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव विजेंद्र केसरी ने कहा कि सरकार ने 19 लाख लोगों को चुनाव में रोजगार देने की घोषणा की थी वह सभी जुमले साबित हो रहे हैं छात्रों को पढ़ाई और लड़ाई के संघर्षों को तेज करना चाहिए और अधिकार के लिए संघर्ष करते रहना चाहिए। सम्मेलन को ऑल इंडिया यूथ फेडरेशन के  राज्य सचिव ने भी संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि छात्र और युवा एक सिक्के के दो पहलू हैं दोनों की मांग एक ही है दोनों को एक होकर संघर्ष करना होगा अपने मांगों और अधिकार की लड़ाई लड़नी होगी। सम्मेलन में 55 सदस्यीय राज्य परिषद एवं 7 सदस्यीय सचिव मंडल का निर्णय सर्वसम्मति से किया गया। जिसमें सचिव रणजीत पंडित, अध्यक्ष अमीन हामजा, उपाध्यक्ष रजनीकांत, भाग्य भारती, संयुक्त सचिव राहुल कुमार, जन्मेजय कुमार, कोषाध्यक्ष गरुड़ प्रियम को सर्वसम्मति से चुना गया। सम्मेलन का समापन हम होंगे कामयाब गीत गाकर किया गया। सम्मेलन को सफल बनाने में शिक्षक नेता राकेश राही, जफर इमाम, रजनीश कुमार का सहयोग रहा। सम्मेलन में 8
अप्रैल एसेम्बली बमकांड दिवस पर शिक्षा और रोजगार के मांग को लेकर बिहार के सभी जिलों में समाहरणालय पर प्रदर्शन व 10 मई को 1857 की 150 वी वर्षगांठ मनाने का निर्णय लिया गया।

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