बाहर से आ रहे लोगों की रैपिड ऐन्टीजन किट से होगी कोरोना जांच: डीएम

जिलाधिकारी ने जारी किये आदेश, अस्थायी कैम्प लगाकर दण्डाधिकारी सहित तैनात रहेंगे पर्याप्त पुलिस बल

सुपौल:- जिले में कोरोना संक्रमण के नये मामलों में कमी आ रही है। प्रशासन द्वारा लगाये गये प्रतिबंधों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। वहीं जिले में बाहर से आ रहे संक्रमितों की पहचान के लिए जिलाधिकारी, महेन्द्र कुमार ने तीन स्थानों का चयन करते हुए वहां कोविड जांच टीम प्रतिनियुक्त करने के निदेश सिविल सर्जन डा. ज्ञान शंकर झा को दिये। उक्त तीनों स्थलों सरायगढ़ मोड़, सिमराही चौक, भीमपुर चौक सभी जिले से गुजरने वाली राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 57 पर अवस्थित हैं। जिलाधिकारी के मुताबिक ऐसा जिले में बाहर से आ रहे कोरोना संक्रमितों की पहचान करते हुए उनका समुचित इलाज समय रहते हो सके के उद्देश्य से किया जा रहा है। रैपिड ऐन्टीजन किट से की जाएगी जांच:- अपने उक्त आदेश में जिलाधिकारी महेन्द्र कुमार ने सिविल सर्जन को निदेश दिये कि चयनित तीनों स्थलों के लिए जांच टीम गठित करते हुए उन्हें पर्याप्त संख्या में रैपिड ऐन्टीजन किट उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें| ताकि जांच टीम वैसे बाहरी व्यक्तियों की कोरोना जांच कर सके जो सुपौल जिला में बाहर से प्रवेश कर रहे हैं। प्रशासनिक पदाधिकारियों को भी दिये अवश्यक दिशा-निर्देश
जिलाधिकारी, महेन्द्र कुमार ने अपने उक्त आदेश में चयनित स्थालों से संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी एवं अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी को निदेश दिये कि वे अपने स्तर से उक्त तीनों स्थलों पर दण्डाधिकारी एवं पुलिस पदाधिकारी सहित पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित करें।  साथ ही इन स्थलों का लगातार निरीक्षण तथा पर्यवेक्षण करते रहें। प्रखंड विकास पदाधिकारी को भी दिये आवश्यक दिशा निर्देश:- जिलाधिकारी, महेन्द्र कुमार ने अपने उक्त आदेश में संबंधित स्थलों के प्रखंड विकास पदाधिकारी को उक्त तीनों स्थलों पर अस्थायी कैम्प की व्यवस्था करना सुनिश्चित करने के आदेश जारी किये हैं। उन्होंने कहा है कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ट्रैकिंग, टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट कोराना को हराने में कारगर कदम के रूप में माना जा रहा है। बताया जिले से होकर गुजरने वाली अतिव्यस्त राज मार्ग संख्या 57 से काफी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में वर्तमान समय में जिले में राज्य के बाहर से आ रहे लोगों की निगरानी करना आवश्यक है। ताकि यह पता चल सके कि जिले में बाहर से आ रहे लोगों को कोराना संक्रमण है या नहीं। यदि वे संक्रमित हैं तो संक्रमण के अनुरूप होम आइसोलेशन या जिले में चल रहे कोविड डेडिकेटेड केयर सेंटरों में उनका समय रहते इलाज किया जा सके।

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