सरकारी अस्पतालों में औषधि की रियल टाइम मिल रही जानकारी

पटना:-मुफ्त दवा नीति के तहत सरकारी अस्पतालों में क्यूआर कोड की स्कैनिंग सुविधा से दवाओं की उपलब्धता एवं वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाई जा रही है। ओपीडी, दवा वितरण काउंटर पर उपलब्ध क्यूआर कोड को स्कैन कर मरीज या उनके परिजन खुद अस्पताल में दवा की मौजूदगी का पता लगा रहे हैं। क्यूआर कोड तकनीक की यह व्यवस्था सीधे तौर पर डीभीडीएमएस पोर्टल के ऑटो अपडेट से जुड़ी है। इससे सरकारी अस्पतालों में औषधि की रियल टाइम जानकारी विभाग को सीधे मिल रही है।          मालूम हो कि मुख्यमंत्री डिजिटल हेल्थ योजना के तहत डिजिटल हेल्थ फॉर ऑल के सुदृढ़ीकरण के लिए 21 मार्च को राज्य में क्यूआर कोड स्कैनिंग कर सरकारी अस्पतालों में औषधियों की जानकारी के लिए प्रणाली की शुरुआत मंगल पांडेय, स्वास्थ्य मंत्री, बिहार सरकार द्वारा की गयी थी। इस पहल को जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तक लागू किया गया है। राज्य में दवाओं की ससमय उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य में क्यूआर कोड की सुविधा के साथ मुफ्त औषधि वाहन एवं जानकारी वाली लिफाफे में दवा दी जा रही है.इस पहल से न सिर्फ मरीजों को सहूलियत हो रही है बल्कि दवा वितरण के दौरान लोगों में असंतोष की भावना में भी कमी आयी है। जिला अस्पताल, जमुई में मंगलवार को दवा लेने गई अंजली कुमारी ने बताया कि अब कोई अस्पताल कर्मी दवा देने में कोताही नहीं बरत सकते हैं क्योंकि दवाओं के उपलब्धता की सारी जानकारी अब मरीजों के पास भी रहती है। लाल और हरे रंग में दवाओं की उपलब्धता:-जैसे ही मरीज क्यूआर कोड को स्कैन करेगा, उसके मोबाइल स्क्रीन पर उपलब्ध ओपीडी और आईपीडी दवाओं की सूची हरे रंग में और अनुपलब्ध दवाओं की सूची लाल रंग में दिखेगी। यह व्यवस्था पूरी तरह रियल टाइम पर आधारित है, जिससे मरीज को सटीक व ताजा तरीन जानकारी मिल सकेगी।                                            राज्य के सरकारी अस्पतालों में आमजन को सभी प्रकार की आवश्यक दवाएं निशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण प्राप्त हो, इस उद्देश्य से चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल एवं जिला अस्पताल से लेकर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर उपयोग हेतु मातृ शिशु डायबिटीज, कैंसर, आई केयर, किडनी, स्ट्रोक जैसे गंभीर बीमारियों की औषधियों का समावेश करते हुए 611 प्रकार की आवश्यक औषधियों की सूची अधिसूचित है।

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