डिजिटल हिमोग्लोबिनोमीटर गर्भवती महिलाओं व किशोरियों की एनीमिया जांच में होगी सहायक

सासाराम:- गर्भवती महिलाओं के साथ किशोरियों के स्वास्थ्य को लेकर सरकार लगातार फिक्रमंद है। खासकर एनीमिया जैसी बीमारी से पीड़ित गर्भवतियों एवं किशोरियों को एनीमिया मुक्त कर बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयासरत है। इसके लिए नई नई तकनीक और अभियान के मध्यमा से देश को एनीमिया मुक्त करने की मुहिम चलाई जा रही है। एनीमिया पीड़ित गर्भवती महिला एवं किशोरियों की हिमोग्लोबिन जांच के लिए नई तकनीक डिजिटल हिमोग्लोबिनोमीटर से हिमोग्लोबिन की जांच की जायेगी। इधर रोहतास जिले में भी हिमोग्लोबिन जांच की नई तकनीक को क्रियान्वित किया जा रहा है।           इसके लिए जिले की सभी संबंधित एएनएम को प्रशिक्षण प्रदान कर दिया गया है। घर-घर जाकर करेंगी जांच:-जानकारी के अभाव में गर्भवती महिलाओं के साथ साथ किशोरियों में होने वाली एनीमिया बीमारी से मुक्ति दिलाने के लिए एएनएम महिलाओं एवं किशोरियों का हिमोग्लोबिन जांच करेंगी और ऑन स्पॉट रिपोर्ट मुहैया कराएगी। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में अक्सर खून की कमी हो जाती है और वो एनीमिया से पीड़ित हो जाती है। खून की कमी और जांच के अभाव में एनेमिक होने की जानकारी नहीं मिल पाती है जिससे उनकी जिंदगी एवं उनके गर्भस्थ शिशु की जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। इससे निपटने के लिए जिला स्वास्थ समिति ने जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। डिजिटल मीटर से हिमोग्लोबिन जांच के लिए सभी एएनएम को डिजिटल हिमोग्लोबिनोमीटर से लैस कर दिया गया है। एएनएम हिमोग्लोबिन की जांच तो करेंगी ही साथ ही साथ एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को सचेत करेंगी और इससे निपटने के लिए जानकारी भी देंगी। एनीमिया से मिलेगी मुक्ति:-जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ आर के पी साहू ने बताया कि गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ किशोरियों में एनीमिया बीमारी अक्सर देखा जाता है। जिसका मुख्य कारण असंतुलित भोजन एवं एनीमिया के बारे में जानकारी ना होना होता है। इसे दूर करने के लिए डिजिटल हिमोग्लोबीनोमीटर के माध्यम से एनीमिया की जांच की जाएगी जिससे खून की कमी के तुरंत पता चल जाएगा। ऐसे में उक्त महिला एवं किशोरी का इलाज करने में सहूलियत हो जाएगी और एनीमिया पर भी काबू पाया जा सकेगा। डीआईओ ने बताया कि जिले को लगभग ढाई सौ के आसपास डिजिटल हीमोग्लोबीनोमीटर प्रदान किए गए हैं जो सभी उप स्वास्थ्य केदो के साथ-साथ आरबीएसके को उपलब्ध करा दिया गया है। समय-समय पर अभियान के तहत स्कूलों में किशोरियों का हीमोग्लोबिन की जांच की जाएगी और इससे पीड़ित किशोरियों को उचित परामर्श दिया जाएगा ताकि हिमोग्लोबिन की कमी को पूरा किया जा सके।

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