जिंदगी में बेहतर बदलाव के आठ कदम…..

जिंदगी में बेहतर बदलाव के आठ कदम….

पटना:-हम भले ना चाहे, पर बदलाव होना तय है। हम अगर स्वयं आगे नहीं बढ़ते, तो जिंदगी ऐसे हालत बना देती है कि आगे बढ़ाना हमारी मजबूरी हो जाती है। हम बदलाव से कतराते हैं, क्योंकि उसके साथ कुछ बेचैनी और डर जुड़े होते हैं। यह कुछ ऐसे संकेत दिए जा रहे हैं, जींस आप जान सकते हैं कि आपका जीवन बेहतर दिशा में आगे बढ़ रहा है–जीवन में अक्सर बेहतर बदलाव उन पलों की उपज होते हैं, जो हमें बेचैन और असुरक्षित महसूस कराते हैं। कई बार हम बदलाव की ओर कदम ही तब बढ़ाते हैं, जब आगे बढ़ना ही हमारे सामने एकमात्र विकल्प बसता है। दरअसल, स्थिरता और संतुलन हमारी बुनियादी संचालन का हिस्सा है। हम सुरक्षित दायरे में रहने के लिए बने हैं। जिसमें सब कुछ जाना पहचान रहे। पर, जरूरी नहीं यही जाने-पहचाने रास्ते हमारे लिए अच्छे भी हो। कहीं न कहीं हम स्वयं भी यह जानते हैं। हम जब अपनी भीतरी प्रेरणाओं पर ध्यान नहीं देते, तो जिंदगी स्वयं ही ऐसे हालात बना देती है, जो हमें आगे बढ़ाने के लिए मजबूर कर देते हैं। बदलाव की इस प्रक्रिया में डरने की बजाय, हमें इन्हें गले लाना चाहिए। इसका अर्थ है जीवन में कुछ बड़ा होने वाला है। यहां कुछ बातें हैं, जो बदलाव से पहले हमारे जीवन में घटित है:-
1.कोई बड़ा धक्का लगना…..
बदलाव की ओर ले जाने वाली वजह छोटी भी हो सकती है और बड़ी भी। कुछ लोगों के लिए सकारात्मक बदलाव की प्रक्रिया किसी अपने के दूर होने, किसी से धोखा मिलने या अचानक नौकरी छूट जाने के नुकसान से जुड़ी होती है। कुछ ऐसा छूटना, जिससे आपकी भविष्य की खुशियां जुड़ी थी। यह वजह बहुत मामूली भी हो सकती है, जिसका पता ही न चले। मसलन, अपके किसी पुराने दोस्त को देखकर आप अपनी प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित हो जाए। या फिर आपका करीबी कुछ बड़ा करने जा रहा है, जिसे देख कर आप यह सोचने के लिए मजबूर हो जाए कि आखिर आप जिंदगी में क्या चाहते हैं? ध्यान रखें, जीवन में किसी न किसी बाधा के होने पर ही बेहतर बदलाव आते हैं। कुछ ऐसा, जो हमें अपनी मौजूदा स्थिति पर सोचने और उसे बदलने के लिए प्रेरित या मजबूर कर देता है।
2.सच-स्वीकारना…..
कई बार बदलाव की ओर ले जाने वाले कारण लंबे समय से हमारे जीवन में होते हैं, बस हम उनका एहसास नहीं कर पाते। आमतौर पर हम जो कुछ भी खोते हैं, इसका एहसास कहीं न कहीं हमारे भीतर लंबे समय से बना होता है। जैसे, जो रिश्ता खत्म हुआ, उसमें लंबे समय से खटास बढ़ रही थी। जिस नौकरी को आपने छोड़ा या छूट गई, उसमें आपको लंबे समय से अच्छा नहीं लग रहा था या इस बात की आशंका थी। जीवन में कुछ भी बिना मकसद के नहीं होता। वहीं कुछ भी हो जाए, हम अपना मकसद तलाश सकते हैं। पर सबसे पहले जरूरी यह है कि हम अपने सोच को स्वीकार लें।
3.अपने भावों को गले लगाना…..
जब कोई सीमा पार करता है या आपके साथ अन्याय होता है, तो गुस्सा आना सामान्य है। अच्छी भली जिंदगी अचानक पटरी से उतर जाए और आपको नहीं पता कि आगे क्या होगा, तो दुखी होना और डर महसूस करना सामान्य है। जितना आप इन भावनाओं का विरोध करेंगे, उतना यह आपसे चिपकी रहेगी। यह समझे कि यह उठा-पटक बड़े बदलाव की प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके भीतर गहरे ज्ञान के बीज छिपे हैं।
4.अतीत में न अटकना…..
लंबे समय तक भीतर दबी हुई भावनाओं के बीज कई बार कई गुणा बनकर फूटते हैं। हमारी भावनाएं तब तक भीतर बनी रहती है, जब तक हम सही सबक नहीं सीख लेते। अक्सर दबे हुए भाव हमें अप्रिया और अयोग्य होने का एहसास करने लगते हैं। पर उनका असर संदेश यह है कि हम अपने मूल्यों से मिलते-जुलते हालात नहीं बन पा रहे हैं। हम यह नहीं पहचान पा रहे हैं कि हम वास्तव में कितने योग्य और प्रिया है, इसलिए हम हमेशा खुद को दूसरों की नजर में हीन समझते रहते हैं। अतीत में किस बात ने आपको ठेस पहुंचाई, आपको तब कैसा महसूस हुआ था, इसे याद करने की प्रक्रिया में, आप पाएंगे कि आपका बहुत सारा आत्मविश्वास उन अनुभवों से बना था, जो आपके भीतर एक के ऊपर एक जाम हो रहे थे। और अब, आप खुद को खुलने का मौका दे रहे हैं। खुद को अतीत के बोझ से हल्का बना रहे हैं।
5.उम्मीद की किरण…..
कई बार ऐसा होता है कि आप हमेशा के लिए हर मानने वाले होते हैं की तभी उम्मीद की एक किरण दिखाई देती है। हो सकता है कि एक दिन अचानक आपके मन में कुछ नया करने का विचार आ जाए, हो सकता है कि आप किसी ऐसे व्यक्ति से जुड़ जाएं, जिसके पास आपके योग अच्छे मौके हैं, आप किसी नए काम को करने के लिए प्रेरित हो जाए, आप कहीं दूर स्थान पर चले जाएं… या आपको लगे की जल्दी ही अब आपकी जिंदगी में ऐसा कुछ होने वाला है। कुल मिलाकर, कहीं न कहीं भीतर लगता है कि कुछ अच्छा हो सकता है, बस आप पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। हालांकि, इसकी जरूरत भी नहीं है। अपनी उसे हल्की सी उम्मीद को था में बस आप आगे बढ़ते रहें।
6.छोटे-छोटे संतुलन…..
मन में आ रहे नए विचारों की ओर धीरे-धीरे कदम बढ़ाना। हो सकता है कि अपने विचारों की दिशा में बढ़ना, इससे जुड़ी बेचैनी आपको अपने बालों और कपड़ों के स्टाइल, काम करने के तरीकों और खाली समय का इस्तेमाल अलग ढंग से करने के लिए प्रेरित करें। पर, धीरे-धीरे, छोटे-छोटे कदमों से आप खुद को नए तरीके से उभरते हुए महसूस करते हैं। आप उन नए विचार, नहीं दिनचर्या में खुद को ढलता हुआ पाते हैं, जो आप बनना चाहते हैं।
7.लंबी चलांग…..
छोटे बदलावों के बाद अब आप यह जान गए हैं कि लंबी छलांग लगाने का समय आ गया है। यह नई नौकरी शुरू करना, पुरानी को छोड़ना या फिर जीवन में किसी ऐसी चीज को बदलना, जिसे आप पहले सोच भी सकते हैं। यह बदलाव की प्रक्रिया का डराने वाला एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपके जीवन में नई और सकारात्मक चीजों को लाने के लिए, कई बार आपको उन तक पहुंचाना पड़ता है। इसके लिए आपको अपनी सुरक्षित दायरे से बाहर निकलकर नई तरीकों से सोचना पड़ता है। खुद पर और अपनी सोच पर भरोसा रखना पड़ता है। यही वह छलांग है, जिसके लिए आप तैयार हो रहे हैं। यह बात सपना था, जो आपके भीतर गहराई से छिपा हुआ था। जिसने आपको अपनी बीती चीजों से आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया, फोन भावनाओं पर काम करने के लिए तैयार किया, जो आपका रास्ता रोक रही थी, और अब आप सच बन चुकी हैं। यह आपके भीतर हमेशा से मौजूद रहा है। बस आपको इसे चुनने का साहस ढूंढना था।
8.दर्द में मकसद तलाशना…..
अंततः आप अपनी बढ़ाओ को पर कर कर, नए जीवन में प्रवेश कर चुके हैं। अब आप समझ पा रहे होंगे कि खुद और बेचैन कर रहे विचारों का भी एक मकसद था। अगर आप सजग हैं, तो यह समय पाएं की मूल रूप से अगर यह बधाएं जीवन में न होती, तो आप अपनी सुरक्षित दायरे से बाहर ही न निकलते। आपके शेष जीवन को अधूरे सपनों के साथ ही जीते चले जाते। अपने दर से आगे निकलने की कोशिश न करते और साहस की कमी के कारण विपरीत हालातों को ही अपनी नियति मान लेते। कभी-कभी जब हम वो काम नहीं करते, जो हमें करना चाहिए, तो हम अपने लिए ऐसी परिस्थितियां बना लेते हैं, जहां आगे बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचता। भाग्य को नकारा नहीं जा सकता। शायद, यह सोचकर आपको कुछ शांति मिल सकती है। आप समझ पाएंगे कि अपनी भावनाओं से डरने की जरूरत नहीं है। कई बार तूफान के बाद ही आसमान साफ होता है। उन बीजों को पानी मिलता है, जो लंबे समय से पनपने का इंतजार कर रहे थे। आपको बस एक धक्के की जरूरत थी।

लक्ष्मी सिन्हा,
(प्रदेश अध्यक्ष)
अखिल विश्व सत्य सनातन संघ बिहार (पटना)

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