कृषि अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा माधोपुर (पश्चिम चंपारण) में समेकित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधिकरण विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ

पश्चिम चंपारण(माधोपुर):- कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर, पश्चिम चंपारण में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना एवं कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के संयुक्त तत्वावधान में “समेकित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधिकरण” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया, जिसमें पश्चिम चंपारण जिले के 200 से अधिक किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।        इस कार्यशाला का उद्देश्य किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं टिकाऊ कृषि प्रणालियों की जानकारी देकर उनकी आय में वृद्धि करना तथा बदलते जलवायु परिदृश्य में खेती को सुरक्षित एवं लाभकारी बनाना है। कार्यक्रम की शुरुआत कार्यशाला समन्वयक एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. शिवानी के स्वागत भाषण से हुई। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि समेकित कृषि प्रणाली किसानों के लिए एक समग्र मॉडल है, जिसमें फसल उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य कृषि उद्यमों को एकीकृत किया जाता है। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग, कम लागत में अधिक उत्पादन तथा आय के विविध स्रोत विकसित होते हैं।           उन्होंने यह भी कहा कि फसल विविधिकरण अपनाकर किसान जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं। कार्यशाला के आयोजन सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के फसल अनुसंधान प्रभाग के अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्वी भारत एवं बिहार जैसे राज्यों में छोटे एवं सीमांत किसानों की आमदनी बढ़ाने में समेकित कृषि प्रणाली एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। उन्होंने बदलते जलवायु परिदृश्य में जोखिम प्रबंधन के लिए फसल विविधिकरण को अत्यंत आवश्यक बताते हुए खरीफ एवं रबी फसलों के साथ-साथ दलहन, तिलहन, सब्जी एवं चारा फसलों को अपनाने की सलाह दी, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे तथा उत्पादन में स्थिरता आए। कार्यशाला के मुख्य अतिथि बगहा विधानसभा क्षेत्र के विधायक माननीय राम सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में पारंपरिक खेती के साथ-साथ समेकित कृषि प्रणाली एवं फसल विविधिकरण को अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है। इसे अपनाकर किसान अपनी आय को स्थायी एवं सुदृढ़ बना सकते हैं। उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर द्वारा किसानों के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।         कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा किसानों के बीच विभिन्न कृषि आदानों जैसे गटोर स्प्रेयर मशीन, नैपसेक स्प्रेयर मशीन तथा वर्मी बेड का वितरण किया गया, जिससे फसल संरक्षण, कीट एवं रोग प्रबंधन तथा जैविक खाद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। यह उल्लेखनीय है कि यह महत्वपूर्ण कार्यशाला भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास के दिशा-निर्देशन में आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के आयोजन में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के कुलपति डॉ. पी.एस. पांडेय का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। कार्यशाला के दौरान किसानों को समेकित कृषि प्रणाली, फसल विविधिकरण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, जल संरक्षण, उन्नत बीज एवं आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से संबंधित जानकारी तकनीकी सत्रों के माध्यम से दी जा रही है तथा व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है। इस कार्यशाला को सफल बनाने में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक कुमार, डॉ. गौस अली एवं डॉ. शिवानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही पश्चिम चंपारण के जिला कृषि पदाधिकारी मो. सरफराज असगर एवं क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान, माधोपुर के वैज्ञानिक डॉ. नीरज कुमार भी अवसर पर उपस्थित रहे।           कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के विषय-वस्तु विशेषज्ञ डॉ. जोगपाल, डॉ. हर्षा बी.आर., डॉ. सौरभ दुबे एवं केंद्र के अन्य कर्मचारियों का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा। कार्यक्रम के अंत में कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों, किसानों एवं आयोजन से जुड़े सभी सहभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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