बजट सतत एवं समावेशी आर्थिक विकास की अवधारणा को सुदृढ़ करता है:-सुनील

सहरसा:-भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के अध्यनरत शोध छात्र सुनील कुमार ने बजट का स्वागत करते हुए कहा वर्ष 2026-27 कि यह बजट केवल वार्षिक आय-व्यय विवरण ना हो करके भारतीय अर्थव्यवस्था के संरचनात्मक रूपांतरण का रोडमैप प्रस्तुत करता है साथ ही कल्याणकारी योजनाओं एवं सुधारोंमुख नीतियों के माध्यम से यह बजट सतत एवं समावेशी आर्थिक विकास की अवधारणा को सुदृढ़ करता है। एक अर्थशास्त्र के शोध छात्र के रूप में सुनील कुमार ने बजट को समष्टि अर्थशास्त्र के व्यापक फलक पर देखा है। वर्ष 2026-27 के संदर्भ में, जब भारत ‘विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में बजट को जीडीपी के साथ-साथ सामाजिक कल्याण के संतुलन के रूप में देखना ही सही दृष्टिकोण है।                         बजट के इस तरह के सकारात्मक और तकनीकी विश्लेषण से न केवल छात्रों की विषय पर पकड़ दिखती है, बल्कि यह अन्य शोधार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है। यह बजट केवल लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि यह भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव बदलने वाला दस्तावेज़ है। यह संकेत देता है कि सरकार पारंपरिक तरीकों से हटकर आधुनिक और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि बजट में केवल पैसे खर्च करने पर जोर नहीं दिया गया है, बल्कि नीतियों में सुधार जैसे श्रम, कृषि या बैंकिंग सुधार के जरिए निवेश के अनुकूल माहौल बनाने की कोशिश की गई है।

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