छोटा और सीमित परिवार के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना सबसे पहली नींव:-सीएस

बक्सर:-जिले में जनसंख्या स्थिरीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिशन पखवाड़ा विकास अभियान का संचालन किया जा रहा है। जिसके तहत आगामी 11 फरवरी तक दंपति संपर्क सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। वहीं, 12 से 24 फरवरी तक परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा का भी संचालन किया जाएगा। इस संबंध में जिला स्वास्थ्य समिति से प्राप्त निर्देशों के आलोक में सिविल सर्जन डॉ. सुरेश चंद्र सिन्हा ने सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी व उपाधीक्षकों को पत्र भेजकर गतिविधियों का आयोजन करने की मांग की है। ताकि, मिशन पखवाड़ा विकास अभियान के उद्देश्य को पूरा किया जा सके। इस दौरान पखवाड़े की सफलता को लेकर जिले भर में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन कर सामुदायिक स्तर पर लोगों को जागरूक और योग्य दंपति को परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। ताकि एक भी योग्य लाभार्थी पखवाड़े की सुविधा से वंचित नहीं रहें। पखवाड़े का सफल संचालन सुनिश्चित करने को लेकर सहयोगी स्वास्थ्य संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा।नियोजन के साधन को अपनाना सबसे पहली नींव:-सिविल सर्जन डॉ. सुरेश चंद्र सिन्हा ने बताया कि समाज के हर तबके के सभी परिवार को गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जीने के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना बेहद जरूरी है। तभी हम गुणवत्तापूर्ण जिंदगी जी सकते हैं। बच्चे को उचित परवरिश एवं अच्छी शिक्षा दे सकते हैं।            छोटा और सीमित परिवार के लिए परिवार नियोजन के साधन को अपनाना सबसे पहली नींव है। उन्होंने बताया कि मिशन पखवाड़ा विकास अभियान के तहत योग्य और सक्षम इच्छुक लाभार्थियों को परिवार नियोजन के साधन को अपनाने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है। पखवाड़े के पहले चरण में आशा कार्यकर्ताआएं अपने अपने पोषण क्षेत्र में योग्य दंपति से मिलेंगी। साथ ही, उन्हें परिवार नियोजन के अस्थायी व स्थायी साधनों की जानकारी देते हुए, उन्हें इन साधनों के प्रयोग के लिए प्रेरित करेंगी। वहीं, इस अभियान में पुरुषों की भागीदारी बढ़ाने के अलावा महिलाओं की भूमिका को सार्थक बनाने के लिए सास-बहू-बेटी सम्मेलन का भी आयोजन किया जाएगा। लाभार्थियों व उत्प्रेरक को दी जाती है प्रोत्साहन राशि:-डीसीएम हिमांशु सिंह ने बताया कि जिले में परिवार नियोजन के अस्थायी के प्रति शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लोगों में पूर्व की अपेक्षा जागरूकता बढ़ी है। लेकिन, स्थायी साधनों के प्रयोग की बात की जाए तो अभी भी पुरुष महिलाओं से काफी पीछे हैं। हालांकि, इस कमी को दूर करने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। महिला बंध्याकरण की अपेक्षा पुरुष नसबंदी काफी सरल और सुरक्षित भी है। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पतालों में पुरुष नसबंदी का लाभ उठाने पर लाभार्थी को 3000 रुपए व उत्प्रेरक को 400 रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। महिला बंध्याकरण के लिए लाभार्थी को 2000 रुपए व उत्प्रेरक को 300 रुपए, प्रसव उपरांत बंध्याकरण पर लाभार्थी को 3000 रुपए व उत्प्रेरक को 400 रुपए, प्रसव उपरांत कॉपर-टी लगाने पर लाभार्थी को 300 रुपए व उत्प्रेरक को 150 रुपए, गर्भपात उपरांत कॉपर-टी लगाने पर लाभार्थी को 300 रुपए व उत्प्रेरक को 150 रुपए, गर्भनिरोधक सुई (अंतरा) का लाभ उठाने पर लाभार्थी को 100 रुपए व उत्प्रेरक को 100 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है।

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