अपने पहले ही अहम फैसले को समय पर पूरा नहीं कर पाना कुलपति के पदाधिकारियो पर नियंत्रण नहीं का संकेत

मधेपुरा:-विगत दिनों कुलपति और कुलसचिव को पत्र लिख सीनेट सिंडिकेट की बैठक लम्बे अरसे से नहीं होने पर सवाल खड़े करने वाले वाम युवा संगठन एआईवाईएफ जिला अध्यक्ष हर्षवर्धन सिंह राठौर ने सीनेट, सिंडिकेट बैठक से जुड़ा बड़ा खुलासा करते हुए कुलपति सहित बीएनएमयू प्रशासन को सवालों के कटघरे में खड़ा किया है। वाम युवा नेता हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने 29 जनवरी को बीएनएमयू कुलसचिव द्वारा कुलपति के आदेशानुसार जारी ज्ञापांक संख्या 60/24 का हवाला देते हुए कहा है जब कुलपति के आदेशानुसार जारी पत्र में तीन फरवरी से तेरह फरवरी के बीच सम्बन्धन एवम् नव शिक्षण कार्यक्रम, पद सृजन, अनुशासन, भवन निर्माण, वेतन निर्धारण, क्रय विक्रय, विद्वत परिषद, वित्त समिति की बैठक करवाते हुए पंद्रह एवं बाईस फरवरी को प्रथम एवं द्वितीय सिंडिकेट कराने की बात करते हुए सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर सभी माननीय सदस्यों को आमंत्रण पत्र भेजने, ईमेल, व्हाट्सएप आदि द्वारा भी सूचित करने की बात कही गई थी फिर किन हालातों में पूर्व निर्धारित समय पर प्रथम बैठक नहीं हो पाई जबकि अर्धवार्षिक सीनेट के एक साल और मासिक सिंडिकेट छः माह विलंब चल रही है। राठौर ने कहा कि बीएनएमयू पहले से ही बेपटरी हुई पड़ी है ऊपर से ऐसी लचर व्यवस्था और गर्त मे ले जाने वाली ही प्रतीत हो रही।                             नए कुलपति पहले फैसले में ही नहीं नजर आए प्रभावकारी:-राठौर ने नव नियुक्त कुलपति की प्रशासनिक क्षमता को सवालों में घेरते हुए कहा कि वर्तमान कुलपति से लोगों को बड़ी उम्मीदें हैं लेकिन अपने पहले बड़े फैसले खुद द्वारा निर्धारित समय पर बहु प्रतीक्षित सिंडिकेट बैठक नहीं हो पाना उनकी प्रशासनिक पकड़ पर सवाल खड़े कर रहे हैं। निर्धारित समय पर बैठक नहीं होने से ऐसा लग रहा जैसे कुलपति को उनके नीचे के पदाधिकारियों से उचित सहयोग नहीं मिल रहा। यह किसी स्तर पर बीएनएमयू के लिए शुभ संकेत नहीं क्योंकि वर्तमान कुलपति को अभी लंबा सफर तय करने हैं। बैठक से जुड़ी खबर मीडिया से दूर रखना बड़ी साजिश:-पूर्व निर्धारित समय पर बैठक नहीं होने के बाद एआईवाईएफ ने बीएनएमयू के नए अंदाज पर भी प्रहार किया है और पूछा है कि आखिर यह कौन सी नई परंपरा है कि बैठक से जुड़ी गतिविधि 29 जनवरी से शुरू है लेकिन अभी तक खबरों को मीडिया और आमलोगों से दूर रखा गया इससे पता चलता है कि पदाधिकारियों को हो हंगामे के साथ साथ अपनी कमजोर नस पर से पर्दा हटने का डर था। हर बार सिंडिकेट बैठक से जुड़ी खबर प्रमुखता से आती थी लेकिन इस बार यह पूरी तरह गायब रही। बीएनएमयू को यूं मजाक बनाने की जगह मिसाल के रूप में स्थापित करने की जरूरत:-राठौर ने कहा कि दुखद है कि बीएनएमयू समय समय पर कुछ ऐसी हरकत कर जाती है जिससे उसे फजीहत झेलनी पड़ती है वर्तमान में चुपचाप सिंडिकेट का निर्णय, तैयारी के बाद भी तय समय पर बैठक नहीं होना शर्मसार करने वाला है। पदाधिकारियों को ऐसी हरकतों से बचने की जरूरत है बीएनएमयू एक बड़ी संस्था है जिससे जुड़े हर फैसलों पर आम आवाम की भी नजर रहती है। राठौर ने मांग किया कि समय पर बैठक नहीं होने के जिम्मेदार को चिन्हित कर उन पर कठोर कारवाई करनी चाहिए और अविलंब बैठक बुलाई जाए।

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