कीर्ति बाबू द्वारा स्थापित संस्थानों में जयंती पुण्यतिथि एक साथ मनाना शर्मनाक

मधेपुरा:-कोसी में उच्च शिक्षा की लहर लाने आधे दर्जन जिलों में टी पी कॉलेज, पी एस कॉलेज सहित तीन दर्जन शिक्षण संस्थान की स्थापना कर उच्च शिक्षा को सुगम बनाने में अग्रिम पंक्ति के नाम कीर्ति नारायण मंडल को उनकी पुयतिथि पर वृहद स्तर पर याद करने के बजाय दो संस्थानों में जयंती पुण्यतिथि दोनों मना देने पर वाम युवा संगठन एआईएफएफ ने कड़ा ऐतराज जताया है।                  संगठन के जिला अध्यक्ष हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने इसे अक्षम्य अपराध की श्रेणी की हरकत करार दिया है और कहा कि भला एक जिम्मेदार संस्था के अंदर एक ही दिन कीर्ति नारायण मंडल जैसे महामना की जयंती और पुण्यतिथि की गलती कैसे की जा सकती है जो संस्था और समाज अपने संस्थापकों और गौरवशाली अतीत को सम्मान नहीं कर सकता उसका कभी उत्थान नहीं हो सकता। उक्त बातें राठौर ने टी पी कॉलेज में आनन फानन में पुण्यतिथि और बीएनएमयू कुलपति कार्यालय से सौ मीटर की दूरी पर स्थित शिक्षा शास्त्र विभाग में विभाग और आई क्यू ए सी के संयुक्त तत्वाधान में जयंती मना देने के बाद नाराजगी जताते हुए कही।                                 राठौर ने कहा कि आलम यह था कि किसी को पुण्यतिथि याद तक नहीं था जिसका परिणाम रहा कि टी पी कॉलेज में आनन फानन शाम चार बजे पुष्पांजलि अर्पित की औपचारिकता निभाई गई जिसमें माला और फूल भी अदद उपलब्ध नहीं हो सका तो पूजा में काम न आने वाले गुलाब का सहारा लिया गया।सबसे दिलचस्प यह भी है कि जहां पुष्पांजलि की गई उस प्रतिमा पर वर्षों से पुण्यतिथि सात मार्च की जगह सात अप्रैल दर्ज हुआ है जिसमें सुधार को लेकर संगठन ने कई बार पत्राचार भी किया लेकिन सुधार नहीं हुई।वहीं शिक्षा शास्त्र विभाग ने पुण्यतिथि की जगह जयंती ही मना दिया। दूसरी तरफ पी एस कॉलेज प्रशासन ने याद करना भी जरूरी नहीं समझा।           इस संबंध में राठौर ने कुलपति से भी शिकायत की है आखिर यह कैसी ओछी हरकत है जिसमें कीर्ति बाबू जैसे महामना को सम्मान पूर्वक याद करने के बजाय उनका मजाक बनाया जा रहा है। इस घटना पर रोष व्यक्त करते हुए राठौर ने कहा कि ऐसे पदाधिकारियों के मानसिक इलाज की जरूरत है जिन्हे जयंती पुण्यतिथि में अंतर का भी ज्ञान नहीं। कभी परिवार से ज्यादा समाज को कीर्ति बाबू ने दी थी प्राथमिकता:-एआईएफएफ जिला अध्यक्ष राठौर ने कहा कि कितना दुखद है कि जिस कीर्ति बाबू ने कभी अपने परिवार को दरकिनार कर समाज हित को प्राथमिकता देते हुए अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा दान दे टी पी और पी एस कॉलेज जैसे सस्थानों को स्थापित किया जो मधेपुरा का शैक्षणिक गौरव है लेकिन आलम यह है कि आज उसी परिसर में स्थापित उनकी प्रतिमा अन्य दिनों तो उपेक्षित रहती ही है पुण्यतिथि के दिन भी साफ सफाई, रंग रोगन, माल्यार्पण, पुष्पांजलि जरूरी नहीं समझा गया। टी पी कॉलेज में देर शाम औपचारिक रूप से कार्यक्रम कर जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली गई। जिन संस्थानों से अनेकों घरों की रोजी रोटी चलती है उन्हीं लोगों द्वारा कीर्ति बाबू को याद नहीं किया जाना उनकी निम्न स्तरीय सोच का सूचक प्रतीत होता है।           जब खुद को शिक्षाविद करार देने वालों की यह हालत है तो औरों की बात ही जुदा है। एक मुहिम चला जयंती पुण्यतिथि को प्राथमिकता दिलाने की होगी पहल:-राठौर ने कहा कि कीर्ति बाबू समाज की बड़ी पूंजी है उनकी जयंती पुण्यतिथि की अनदेखी बड़ा अपराध है। इसको लेकर सक्रिय संगठनों को एक मंच पर ला संबंधित संस्थानों को चेतावनी के साथ जयंती पुण्यतिथि आयोजन पर गंभीर होने की मांग की जाएगी साथ ही बीएनएमयू प्रशासन से भी आयोजन को अपने कैलेंडर में लाने की मांग होगी।राठौर ने कहा कि इस मामले में कुलपति और संबंधित संस्थान के प्रधान को गंभीर होने की जरूरत है।

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