जिले में 7 नवंबर को 12 लाख 48 हजार 912 बच्चों व किशोर-किशोरियों को खिलायी जायेगी अल्बेंडाजोल की गोली

मधेपुरा:- जिले में आगामी 7 नवम्बर को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जायेगा । इस दौरान स्कूल एंव आंगनबाड़ी के बच्चों को कृमि से मुक्ति के लिए अल्बेंडाजोल की दवा खिलाई जाए गी। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ.विपिन कुमार गुप्ता ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र और स्कूल के बच्चों को कृमि से मुक्ति के लिए अल्बेंडाजोल की दवा खिलायी जायेगी। जिले में एक साल से 19 साल तक के बच्चों व किशोर-किशोरियों को अल्बेंडाजोल की दवा खिलायी जायेगी तथा साथ ही छूटे हुए बच्चों को दवा खिलाने के लिए 11नवम्बर को मॉपअप राउंड चलाया जायेगा।   जिला में 12 लाख 48 हजार 912 बच्चों व किशोर-किशोरियों को दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि जिले के सभी सीएचसी,पीएचसी को अल्बेंडाजोल दवा उपलब्ध करा दी गयी है। उन्होंने कहा कि जिले मे अल्बेंडाजोल की गोली सभी स्वास्थ्य केंद्र को उपलब्ध कराई गई है। जिले के कुल 2213 आंगनबाड़ी केंद्र तथा 1640 सरकारी स्कूल तथा प्राइवेट स्कूल 339 में खिलाई जाएगी अल्बेंडाजोल की गोली। किया जाएगा प्रचार प्रसार तथा उम्र के हिसाब से बच्चों को अल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी:-जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ.विपिन कुमार गुप्ता ने कहा कि अभियान की सफलता को लेकर सभी सरकारी विद्यालयों,आंगनबाड़ी केंद्र एवं ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पोस्टर, बैनर, पंपलेट और माइकिंग आदि के माध्यम से प्रचार प्रसार कराया जाएगा। जिससे कोई भी बच्चा यह दवाई खाने से छूट ना पाए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस पर बच्चों को उम्र के हिसाब से अल्बेंडाजोल की गोली खिलाई जाएगी। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी ने कहा कि अल्बेंडाजोल की दवा बच्चों को खाली पेट में नहीं खाना है। साथ ही आंगनबाड़ी सेविका, शिक्षक को बच्चों को अपने सामने ही दवा खिलानी है। एक से दो साल के बच्चों को अल्बेंडाजोल की आधी गोली पीसकर पानी के साथ देनी है तथा दो साल से तीन साल के बच्चों को पूरी गोली पीसकर पानी के साथ देनी है। वहीं तीन साल से 19 साल तक के सभी बच्चों को पूरी गोली चबाकर पानी के साथ खिलानी है। उन्होंने कहा पीसकर या चबाकर पानी के साथ ही हमेशा अल्बेंडाजोल की गोली खानी चाहिए तथा बिना पीसकर या चबाकर खायी गयी अल्बेंडाजोल गोली का प्रभाव महत्वपूर्ण रूप से कम हो सकता है। उल्टी या मिचली महसूस होने पर घबराए नहीं-जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ.विपिन कुमार गुप्ता ने कहा कि कृमि संक्रमण से बच्चों के स्वास्थ्य पर कई प्रकार के हानिकारक प्रभाव देखे जाते हैं। कुपोषण, खून की कमी, भूख न लगना, बेचैनी, पेट में सूजन और उल्टी दस्त से बच्चा परेशान रहता है। यदि दवा खाने के बाद उल्टी या मिचली महसूस होती है तो घबराने की जरूरत नहीं। पेट में कीड़े ज्यादा होने पर दवा खाने के बाद सिरदर्द, उल्टी, मिचली, थकान होना या चक्कर आना महसूस होना एक सामान्य प्रक्रिया है। दवा खाने के थोड़ी देर बाद सब ठीक हो जाता है । साथ ही किसी प्रकार के प्रतिकूल प्रभाव होने पर तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

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