21 नवंबर से 12 दिसंबर तक मनाया जा रहा पुरुष नसबंदी पखवाड़ा

पटना:- राज्य में जनसंख्या स्थिरीकरण को लेकर सरकार द्वारा लगातार अभियान चलाया जाता है. इसके लिए समय-समय पर परिवार नियोजन पखवाड़ा का आयोजन करके महिला बंध्याकरण और पुरुष नसबंदी पर बल दिया जाता है. जिसमें महिलाओं की सहभागिता पुरुषों से अधिक देखी जाती है. वहीं जनसंख्या स्थिरीकरण में पुरुषों की सहभागिता को लेकर भी सरकार लगातार प्रयासरत है। इसके लिए पुरुषों को आगे आने के लिए लगातार प्रेरित भी किया जाता है. इसी क्रम में राज्य में 21 नवंबर से 12 दिसंबर तक पुरुष नसबंदी पखवाड़ा का आयोजन किया जा रहा है. इसके बेहतर प्रबंधन के लिए जिलों में जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में विभिन्न संबद्ध विभाग के अधिकारीयों एवं सलाहकार के बैठक का आयोजन किया जा रहा है. प्रखंड स्तर पर भी बैठक कर जनमानस को जागरूक एवं प्रेरित करने के लिए आशा, आंगनबाड़ी सेविका, जीविका दीदी, विकास मित्र आदि की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी. “स्वस्थ एवं खुशहाल परिवार, पुरुष सहभागिता से ही होगा यह सपना साकार” इस वर्ष पुरुष नसबंदी पखवाड़ा की थीम रखी गयी है. राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार द्वारा इसके लिए आवश्यक दिशानिर्देश जारी किये गए हैं।           जन प्रतिनिधियों से किया जायेगा संपर्क:-निर्देशित है कि पखवाड़ा को सफल बनाने के लिए सांसद, विधायक, पंचायती राज संस्था के सदस्य, शहरी स्थानीय निकाय, स्वास्थ्य कर्मी एवं सिविल सोसाइटी के सदस्य से पखवाड़ा की अवधि के दौरान विभिन्न गतिविधियों में डिजिटल प्लेटफार्म एवं मीडिया चैनलों का उपयोग करते हुए सहयोग लेने का प्रयास किया जायेगा. साथ ही प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का भी सहयोग प्राप्त किया जायेगा।व्यापक पैमाने पर किया जायेगा प्रचार-प्रसार:- आमजन में जागरूकता उत्पन्न करने के उद्देश्य से ई-रिक्शा के माध्यम से राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के दिशा-निर्देश एवं रूट चार्ट के अनुसार सभी जिला के प्रत्येक प्रखंड में प्रचार-प्रसार कराया जायेगा. नवंबर/दिसंबर माह में सास-बहु-बेटी सम्मलेन का भी आयोजन किया जाएगा. इस दौरान 21 नवंबर से 27 नवंबर, 2025 तक “दंपत्ति संपर्क सप्ताह” एवं 28 नवंबर से 12 दिसंबर तक “परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा” संपादित किया जाएगा। पुरुष भी उठायें परिवार नियोजन की जिम्मेदारी:-एम्स पटना के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की एडिशनल प्रोफेसर डॉ. इंदिरा प्रसाद का कहना है कि पुरुषों को भी अपना परिवार सीमित करने का महत्त्व समझना होगा. महिलाओं द्वारा अकेले परिवार नियोजन की जिम्मेदारी नहीं उठाई जा सकती है. प्रसव के दौरान एवं प्रसव के बाद महिलाओं को कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है. इससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना रहती है. उन्होंने कहा कि पुरुष अपनी नसबंदी कराकर अपने परिवार को सीमित करने में पाना योगदान सुनिश्चित करें. इससे समुदाय में साकारात्मक संदेश जाएगा और परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता में उनका अहम योगदान होगा. पटना सिटी निवासी हरेन्द्र, जो बिजली मिस्त्री का काम करते हैं बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष नसबंदी करायी थी और उन्हें इससे किसी भी तरह की परेशानी नहीं हुई. वह अपना काम पहले की तरह कर रहे हैं और उनका वैवाहिक जीवन भी सामान्य है. हरेन्द्र ने कहा “पुरुषों को आगे आकर नसबंदी करवाना चाहिए अगर उनका परिवार पूरा हो गया है. यह एक सुगम प्रक्रिया है और सरकार इसके लिए पैसे भी देती है. सरकारी अस्पताल में इसका ऑपरेशन निशुल्क किया जाता है।

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