अंतिम परिधि तक के लोगों तक निशुल्क दवा पहुंचाने पर विभाग दे रहा जोर

पटना:-स्वास्थ्य विभाग राज्य में रह रहे अंतिम परिधि तक के लोगों में निशुल्क दवा उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। इसके लिए राज्य के स्वास्थ्य उपकेंद्रों को एचडब्ल्यूसी में परिवर्तित कर ड्रग एंड वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। राज्य में अब तक लगभग 11 हजार 659 एचएससी/एचडब्ल्यूसी तथा 14 सौ एपीएचसी समेत कुल 13 हजार 856 स्वास्थ्य संस्थानों को डीवीडीएमएस से सूचीबद्ध किया जा चुका है। स्वास्थ्य केंद्र को सूचीबद्ध करने का मुख्य मकसद डीवीडीएमएस पर मैपिंग को स्ट्रांग करना है। स्ट्रांग मैपिंग के जरिए स्वास्थ्य केंद्रों पर आवश्यक दवा सूची के अनुरूप आवश्यक पोर्टल के माध्यम से दवा की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। विभाग की मंशा है कि किसी भी पंचायत में रह रहे लोगों का इलाज और उपचार उनके ही पंचायत हो। इससे पंचायत में रह रहे लोगों की निर्भरता जिला व प्रखंड स्तर के अस्पतालों पर कम होगी।                                   केवल उच्च स्तर के इलाज व दवा अथवा रेफर होने पर ही उन्हें बाहर जाना पड़ेगा। बीपी शुगर की 30 दिन की दवा:-
डीवीडीएमएस में सूचीबद्ध होने के बाद एचडब्ल्यूसी पर सौ तरह की दवा,स्वास्थ्य उपकेंद्र पर 25 तरह की दवा तथा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर 120—130 तरह की दवा उपलब्ध रखने को कहा गया है। एचडब्ल्यूसी में सीएचओ के द्वारा एनसीडी की स्क्रीनिंग के साथ बीपी एवं शुगर के मरीजों की लिस्टिंग कर 30 दिनों की दवा दी जा रही है। निशुल्क ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन में बिहार अव्वल:-मालूम हो कि बिहार नि शुल्क ड्रग डिस्ट्रीब्यूशन के मामले में नवंबर में देश में लगातार 15 वें महीने टॉप पर काबिज है। इसने नवंबर माह में राजस्थान और पंजाब जैसे अगड़े राज्यों को पछाड़ 81.64 प्रतिशत अंक हासिल किए है। वहीं दूसरे नंबर पर रहे राजस्थान ने 78.22 तथा पंजाब ने 72.31 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं। राज्य में दौड़ रहे 170 औषधि वाहन:-किसी भी स्तर के स्वास्थ्य केंद्र में दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य में कुल 170 औषधि वाहन पूरे राज्य में दौड़ रहे हैं। इसमें दो लेवल के औषधि वाहन है। लेवल वन की औषधि वाहन जिला स्तर से ब्लॉक स्तर तक के स्वास्थ्य केंद्रों में तथा लेवल दो की औषधि वाहन ब्लॉक से पंचायत स्तर के स्वास्थ्य संस्थानों में औषधि सुनिश्चित कर रही हैं। इससे दवाओं की सुनिश्चितता स्वास्थ्य संस्थानों में सुदृढ़ हुईं है।

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