देश के छात्र, युवाओं को सरकार की गलत नीतियां के विरोध के लिए आगे आना होगा:-शंकर

यूजीसी रेगुलेशन बिल 2026 एक बहाना है इसके आर में विभाशिअ विधेयक 2025 लागू करना है:-शंकर

सहरसा:- सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा विश्वविद्यालय के केंपसों में ओबीसी, एससी-एसटी के छात्राओं के साथ भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए यूजीसी रेगुलेशन बिल 2026 जिसे सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा रोहित वेमुला, पायल तड़वी के मामले में सुनवाई करते हुए निर्देशित किया। विश्वविद्यालय कैंपस महाविद्यालय केंपसों में ओबीसी, एससी-एसटी के साथ भेदभाव रोकने के लिए इस तरह कानून बनाया जाए। उसके बाद भारत सरकार ने यूजीसी प्रमोशन ऑफ इक्वलिटी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन 2026 को लागू किया। उन्हें सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दिया। संगठन अविलंब इसे लागू करने की मांग करती है। एआईएसएफ के राज्य कार्यकारिणी सदस्य शंकर कुमार ने कहा कि देश की सरकार साम्राज्यवादी एवं पूंजीवादी शक्तियों का गुलाम है यह तो सिर्फ एक बानगी है। संविधान की मूल भावना के साथ साम्राज्यवादियों एवं पूंजीवादी शक्तियों के इशारों पर सरकार व देश की संस्था दुरुपयोग करती रही है यह किसी से छिपी हुई बात नहीं है। देश के छात्र, युवाओं को सरकार की गलत नीतियां जो आम जनता व छात्र एवं युवाओं का शोषण करता हो उसे नीतियों के विरोध के लिए आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि यूजीसी रेगुलेशन बिल 2026 को लागू करने को लेकर चल रहे आंदोलन में देश के इतिहास में पहली बार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के निर्वाचित छात्र संघ के प्रतिनिधियों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया और जुर्माना लगा दिया जिसका ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन विरोध करती है। उन्होंने कहा कि जेएनयू प्रशासन जेएनयू छात्र संघ पर किए गए दंडात्मक कार्यवाही पर वापस लेने की मांग करती है।    यूजीसी रेगुलेशन बिल 2026 तो सिर्फ बहाना है इसके आर में विदेशी विश्वविद्यालय बिल जो लंबे दिनों तक लटका हुआ था उसे बिल को छात्रों के विरोध के चलते रोक दिया गया था। उस बिल को विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 में समाहित कर पास किया गया जिसे दोनों सदनों में विरोध के बाद संयुक्त संसदीय समिति को भेज दिया गया।इसी तरह सर्वोच्च न्यायालय में कॉलेजियम सिस्टम के आधार पर होने वाले जजों की नियुक्ति कॉलेजियम सिस्टम के आधार पर अपने हितों को साधने के लिए की जाती है।संगठन कॉलेजियम सिस्टम को समाप्त कर जजों की नियुक्ति के लिए न्यायिक सेवा भर्ती आयोग का गठन किए जाने की मांग करती है। यह आंदोलन इसी रेगुलेशन बिल 2026, कॉलेजियम सिस्टम को निरस्त करने, न्यायिक सेवा भर्ती आयोग बनाने, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025 वापस लेने एवं जेएनयू के निर्वाचित छात्र संघ के पदाधिकारी के ऊपर की गई कार्यवाही को वापस लेने की मांग करती है। संगठन छात्र युवा संघर्ष समिति के द्वारा चरमबद्ध आंदोलन का समर्थन करती है और 9 फरवरी को जिला परिषद से निकलने वाले 4 बजे संध्या मसाल जुलूस में छात्र एवं युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील करती है।

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