बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए मां को पोषित होना जरूरी

सासाराम:- बच्चों में कुपोषण एक गंभीर समस्या है। बच्चों को कुपोषण को लेकर सरकार भी चिंतित है और इसे दूर करने के लिए कई सारी योजनाएं चलाई जा रही है, जिसके माध्यम से बच्चों को कुपोषित होने से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार एकीकृत बाल विकास सेवा योजना (आईसीडीएस) के साथ-साथ पोषण पुनर्वास केंद पर विशेष बल दे रही है। एकीकृत बाल विकास सेवा योजना के तहत जहां एक ओर आंगनबाड़ी केंद्र पर कई विशेष गतिविधियों का आयोजन करके गर्भवती महिलाओं को उचित आहार लेने के बारे में जागरूक किया जाता है ताकि बच्चा कुपोषित न हो सके, तो वहीं पोषण पुनर्वास केंद्र पर कुपोषित बच्चों को भर्ती कराकर उन्हें घोषित करने का प्रयास किया जा रहा है। कुपोषण का मुख्य वजह गरीबी, अशिक्षा, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के बारे में जागरूकता की कमी, सहित कई कारण माने जाते हैं जिसको दूर करने का भी प्रयास किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं को पोषण युक्त आहार जरूरी:-कुपोषण अक्सर जन्म या जन्म से पहले शुरू होता है और 6 माह से 3 साल की अवधि में तीव्रता से बढ़ता है। बच्चों में कुपोषण होने का सिलसिला गर्भावस्था के दौरान ही शुरू हो जाता है, जिसका मुख्य वजह गर्भावस्था के दौरान उचित आहार न मिलना माना जाता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान उचित आहार लेने की सलाह दी जाती है।           इसको लेकर ही आंगनबाड़ी केंद्रों पर प्रत्येक माह गोद भराई और अन्नप्रासन जैसे गतिविधियों को करा कर महिलाओं को पोषणयुक्त आहार के बारे में जानकारी दी जाती है जिसमे प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड, वसा, विटामिन और खनिजों जैसी प्रयाप्त पोषक तत्वों के इस्तेमाल को लेकर जागरूक किया जाता है और गर्भावस्था के दौरान अधिक से अधिक लेने की सलाह दी जाती है। कुपोषण को रोकने का उपाय:-आईसीडीएस डीपीओ रश्मि रंजन ने कहा की कुपोषण एक गंभीर समस्या है। इससे बच्चों की मृत्य भी हो जाती है और बच्चे दिव्यांग भी हो जाते है। डीपीओ ने कहा की कुपोषण को रोकने के लिए सबसे अच्छा तरीका विभिन्न प्रकार के पौष्टिक सम्पूर्ण खाद्य पदार्थों के साथ साथ संतुलित आहार लेना जरूरी है। उन्होंने बताया की कुपोषण के कारण बच्चो और महिलाओं में भी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। उन्होंने बताया की कुपोषण प्रायः प्रयाप्त संतुलित आहार के अभाव में होता है। बच्चों को कुपोषित सोने से बचाने के लिए गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को अधिक से अधिक पौष्टिक आहार लेना चाहिए। साथ ही बच्चों के जन्म होने के बाद भी महिलाओं को संतुलित आहार लेना चाहिए। और बच्चों को 6 महीना तक सिर्फ मां का दूध पिलाना चाहिए। 6 महीना के बाद बच्चों को धीरे धीरे अनुपूरक आहार खिलाना शुरू करना चाहिए।

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