कॉक्लियर इंप्लांट के कारण अब रिशु सुन सकता है परिजनों की आवाज

बक्सर:-जिले में नवजात बच्चों से लेकर किशोरावस्था तक के बच्चों के शारीरिक जटिलताओं और जन्मजात विकृतियों को दूर करने में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) अहम् भूमिका निभा रहा है। आरबीएसके के माध्यम से अब तक जिले के दो दर्जन से अधिक बच्चों की जन्मजात विकृतियों को दूर किया जा सका है। हाल ही में आरबीएसके के माध्यम से जिले में पहली बार एक चार वर्षीय बच्चे की कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी कराई गई। जिसके बाद वह अपने परिजनों की आवाज को सुन सकता है। वह बच्चा बक्सर जिले के केसठ प्रखंड के स्थानीय गांव निवासी अशोक सिंह का बेटा रिशु है। जो बचपन से ही मूक बधिर था।आरबीएसके की टीम को जब रिशु की स्थिति की जानकारी हुई तो उन्होंने उसके कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी के लिए अधिकारियों से संपर्क किया और बीते वर्ष नवंबर माह में उसकी सफल सर्जरी हुई। हालांकि, फिलहाल राज्य मुख्यालय पटना में उसकी अभी स्पीच थेरेपी चल रही है।                                               जिसकी सफलता के बाद रिशु ठीक से बोलना भी सीख सकता है। ऑपरेशन के बाद रिशु के भविष्य को लेकर राहत महसूस की:-रिशु के पिता अशोक सिंह ने बताया कि जन्म के बाद जब उन लोगों को पता चला कि रिशु जन्मजात मूक बधिर है तो उनके परिवार के सदस्यों को काफी सदमा लगा था। लेकिन, जब आरबीएसके के चिकित्सकों ने रिशु की जांच कर उन्हें आश्वस्त किया था कि रिशु के कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी और स्पीच थेरेपी के बाद वह सुन और बोल सकता है तब उन लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था। वहीं, ऑपरेशन के बाद जब रिशु उनकी आवाज पर प्रतिक्रिया करने लगा तो वो रिशु के भविष्य को लेकर थोड़ा राहत महसूस करने लगे। उन्होंने बताया कि मूक बधिर होने के कारण वो और उनकी पत्नी रिशु के भविष्य की काफी चिंता करते थे, लेकिन अब उन्हें उसकी चिंता दूर होने लगी है। स्पीच थेरेपी के सफल होने के बाद वो उसका दाखिला स्कूल में कर देंगे। जहां रिशु अन्य बच्चों की तरह पढ़ और खेल सकेगा। जिले में पहली बार हुई किसी बच्चे की कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी:-डीआईसी मैनेजर सह आरबीएसके के जिला समन्वयक अभिजीत वैद्य ने बताया कि आरबीएसके के माध्यम से जिले में अब तक कई बच्चों की जन्मजात विकृतियों को दूर किया गया है। लेकिन रिशु का मामला जिले में अब तक सबसे अलग है। क्योंकि इससे पहले अब तक किसी भी बच्चे की कॉक्लियर इंप्लांट सर्जरी नहीं कराई गई थी। इसलिए उनकी टीम में पूरा प्रयास करते हुए रिशु की सर्जरी कराई। उन्होंने बताया कि कॉक्लियर इम्प्लांट एक छोटा, जटिल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो किसी ऐसे व्यक्ति को ध्वनि की अनुभूति प्रदान करने में मदद कर सकता है जो पूरी तरह से बहरा है या जिसे सुनने में बहुत कठिनाई होती है। इम्प्लांट में एक बाहरी हिस्सा होता है जो कान के पीछे होता है और दूसरा हिस्सा जिसे ऑपरेशन के माध्यम से त्वचा के नीचे लगाया जाता है। जिसके बाद बच्चा पूरी तरह से सुन सकता है।

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